गुरुवार, 13 अगस्त 2009

तेरे लिए...................


अपनी खुशियों को कर दूंगा निसार तेरे लिए
मेरे दिल में है जो प्यार तेरे लिए
में तारें तो तोड़ कर ला नही सकता
पर तू कहे तो मै हो जाऊंगा फनाह तेरे लिये
मुझे दुनिया ने ठुकराया बस तुने अपनाया
मै जिंदा हूँ बस तेरे लिए
यूँ तो मुझे पता नही की तू चाहती है मुझे या नही
मेरे आँखों को है इंतजार तेरे लिए
तुझसे मुलाक़ात हुई है सिर्फ़ ख्वाबों में फ़िर भी तू ही सवार
है मेरी खाव्बों में ,
मेरा दिल है "प्यासा" मेरा दिल अकेला सिर्फ़ तेरे लिए ........................

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुक्ष्म अनुभुतियों को आपने सुंदर तरीके से इस रचना में पिरो दिया है. बहुत शुभकामनाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  2. मेरा दिल है "प्यासा" मेरा दिल अकेला सिर्फ़ तेरे लिए ...........

    बहुत ही खुबसूरत है आपके ख्वाब ........बहुत ही सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं

अपना अमूल्य समय निकालने के लिए धन्यवाद
क्रप्या दोबारा पधारे ! आपके विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं !