शनिवार, 22 अगस्त 2009

राह


जब हम मिलें तो वो दिन एक था
जहाँ हम मिलें वो जगह एक थी
दोनों की बातें दोनों के विचार
एक थे !
हमें जहाँ जन था वो मंजिल एक थी
मई तो अब भी वहीं कायम हूँ
पर पता नही क्यों तुमने बदल ली
अपनी राह !

1 टिप्पणी:

  1. सुन्दर अविव्याक्ती | भाई एक-दो भूल है सुधार लें तो अच्छा रहेगा |

    हमें जहाँ जन - ये जाना होना चाहिए
    मई तो अब - यहाँ मई की जगह मैं होना चाहिए

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अपना अमूल्य समय निकालने के लिए धन्यवाद
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