गुरुवार, 3 जून 2010

वरिष्ठ ब्लोगरो का दिमाग हुआ खाली, कुछ न बचा तो देते गाली {जूनियर ब्लोगर एसोसिएसन के हमले से धराशाई हुए, चापलूस ब्लाग्गर} सन्तोष कुमार "प्यासा"

अपने आप को वरिष्ठ ब्लोग्गर कहलवाने वाले, जाने कहाँ गुम हो गए ! जिसकी वजह "जूनियर ब्लोगर एसोसिएसन" के बैठक की घोसडा है ! "जूनियर ब्लोगर एसोसिएसन" के बैठक की बात सुनकर बूड़े दिमाग ठंढे हो गए है ! बेचारो की रूह काँप गई है.................... ! जिसका प्रत्यक्ष उदहारण बेनामी टिप्पड़ियाँ है ! वो कहते है न "खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे"...............! बेचारे लाचार है ! बूढी  हड्डियों में कुछ करने की हिम्मत तो बची नहीं ! बेनामी बनकर फूहड़ टिप्पड़ियाँ देने के अलावा इनके पास कुछ बचा भी तो नहीं है.....................! बस गालिया देकर अपने मन की भड़ास निकल लेते है.....................जब दीपक के बुझने का समय आता है तो वो भभकता है ! वही हाल है इनका ! बुझने का समय आया है तो भभकेगें ही ! बस एक फूंक मारने की जरुरत है.! अब बात उठी है तो दूर तलक जाएगी...............! १५ जून को इलाहबाद में "जूनियर ब्लोगर एसोसिएसन" की पहली बैठक है ! जिसके डर से वरिष्ठ गुट्बाज चापलूस ब्लाग्गर मुह छुपाए न जाने कहा बैठे है ! उनकी तो बोलती ही बंद हो गई! अपने आप को ब्लागर के बादशाह समझते थे ! सारी की सारी बादशाहत धरी रह गई ! जिसका कारण है "जूनियर ब्लोगर एसोसिएसन" द्वारा सामूहिक एवं खुलेरूप से विरोध ! "जो चोर है वही मुह छुपाता है , सच्चा तो खुलकर मुस्कुराता है!"
अब गुट्बाज बुढाऊ नहीं दिखाई दे रहे है ! पहले गुर्राते थे अब तो गुर्राना भी बंद कर दिया..............ऐसा हुआ है युवा शक्ति के चौतरफा आक्रमण से ! "जूनियर ब्लोगर एसोसिएसन" धुरंधर लिख्खाड वरिष्ठ ब्लोगरों के पीछे हाथ धोकर पड़ गए है ! अब तो गुट्बजो को जवाब देना ही पड़ेगा ! छुप-छुप कर गलियां देना ही बचा है इनके पास !

पर हमें कोई परवाह नहीं ! गाली देनी हो खुलकर दो, जमकर दो ! क्युकी तुम्हरे पास इसके आलावा कुछ भी नहीं है ! "जूनियर ब्लोगर एसोसिएसन" की बैठक के बाद होगी जमकर कार्यवाही ! बस इंतजार करो................................................

और अंत में...................


जमीं हो गगन बनने की कोशिश मत करना

उड़ जाओगे पवन बनने की कोशिश मत करना

12 टिप्‍पणियां:

  1. अरे मेरे भायो बड़े बुजर्गो को कम नहीं समझना चाहिये वो कब क्या कर दे कोई न जाने
    और mr saleem आप अगर सभ्य भाषा में बात करे तो बड़ी मेहरबानी होगी

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  2. http://deshnama.blogspot.com3 जून 2010 को 11:22 pm

    अभी बच्चे हो, इसलिये कुछ नहीं बोल रहे। जिस दिन एक नोटिस मिलेगा तो सब हेकडी भूल जाओगे

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  3. मुआफ कीजिए प्यासा जी...बौखला तो आप लोग रहे हैं...
    किसने आपकी भैंस खोल ली है जो ऐसे बिना बात खुद ही पोस्ट पे पोस्ट डाले जा रहे हैं आप लोग?..आप जिनकी बुराई कर करे हैं..उन्होंने आपका क्या बिगाड़ा है?...उनमें से किसी की भी तरफ से किसी भी तरह का भड़काऊ ब्यान नहीं आया है..आप खुद ही अकेले ...अपने आप पानी में लट्ठ चलाए जा रहे हैं...क्यों बेकार में अपनी ऊर्जा का नाश करते हैं?..इसे बचा कर रखिए ..वक्त-ज़रूरत काम आएगी

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  4. अर्ज किया है::::

    'प्यासा' की प्यास है
    युवा ब्लोगरों की आस है
    आज तुमने फिर से बढ़िया पोस्ट लिखी है
    पढ़कर लगा कि ये सत्य है ना कि कोरी बकवास है

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  5. Rajiv ji, baukhla ham nahi rahe. ham to bas sach likh rahe hai. jisko bura lagta hai vo gali deta hai. aur rahi bat ki varishth blogaro ne kiya kya hai. to iska javab vo bakhubi jante hai.
    rahi bat urja ki to hamme itni urza hai ki vo shayd hi kabhi khatm ho...............

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  6. अनु मलिक स्टाइल में कहना चाहता हूँ.............

    प्यासा तेरा अंदाज निराला है
    युवा शक्ति से भरपूर तू मतवाला है
    यह तेरे ही प्रयासों का परिणाम है
    सीनियर ब्लोगरों के ब्लॉग पर लटक रहा ताला है

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  7. प्‍यासा जी, सलीम खान की टिप्‍पणी अपत्ति जनक है, ऐसी टिप्‍पणी को बेहिचक हटा दिया करें।

    पूर्व की महाशक्ति के नाम से की गई टिप्‍पणी मेरी नही है किन्‍तु जिनसे भी किया है अच्‍छा किया है। :)

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  8. फिल्म- देशप्रेमी
    गीत-महाकवि आनन्द बख्शी
    संगीत- लक्ष्मीकांत- प्यारेलाल
    नफरत की लाठी तोड़ो
    लालच का खंजर फेंको
    जिद के पीछे मत दौड़ो
    तुम देश के पंछी हो देश प्रेमियों
    आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों
    देखो ये धरती.... हम सबकी माता है
    सोचो, आपस में क्या अपना नाता है
    हम आपस में लड़ बैठे तो देश को कौन संभालेगा
    कोई बाहर वाला अपने घर से हमें निकालेगा
    दीवानों होश करो..... मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो

    मीठे पानी में ये जहर न तुम घोलो
    जब भी बोलो, ये सोचके तुम बोलो
    भर जाता है गहरा घाव, जो बनता है गोली से
    पर वो घाव नहीं भरता, जो बना हो कड़वी बोली से
    दो मीठे बोल कहो, मेरे देशप्रेमियों....

    तोड़ो दीवारें ये चार दिशाओं की
    रोको मत राहें, इन मस्त हवाओं की
    पूरब-पश्चिम- उत्तर- दक्षिण का क्या मतलब है
    इस माटी से पूछो, क्या भाषा क्या इसका मजहब है
    फिर मुझसे बात करो
    ब्लागप्रेमियों... आपस में प्रेम करो

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  9. खैर भरमन करो हमारा ब्लाग
    khotej.blogspot.in

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अपना अमूल्य समय निकालने के लिए धन्यवाद
क्रप्या दोबारा पधारे ! आपके विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं !