मंगलवार, 8 मार्च 2011

MERCY KILNING V/S HONOR KILNING , SANTOSH KUMAR "PYASA"


एक बात तो पक्की है की इस आजाद देश में भी नागरिक (हम) आजाद नहीं है ! आज भी हम गुलामी की जिंदगी  जी रहे है ! कभी हमें  सामाजिक  बुराइयों के आगेबेबस मजबूर होना पड़ता है, तो कभी कानूनी दाव पेंच के आगे ! कोई  अपनी मर्जी ख़ुशी से जीना तो दूर मर भी नहीं सकता ! जिसका प्रमाण दो चीजो से मिलता है जिसमे पहली है "मर्सी किलिंग (इच्छा मृत्यु) और दूसरी है ओनोर किलिंग (इज्जत के नाम पर हत्या) ! पहले बात करते है मर्सी किलिंग की ! मर्सी किलिंग  (इच्छा मृत्यु) की मांग कोई तब करता है जब उसे जीवन से कोई
समस्या हो, या उसका जिन्दा होना मौत से भी बदतर हो !  अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसा मामला आया जिसमे अरुणा शानबाग (जो पिछले ३७ वर्षो से मुंबई के एक हॉस्पिटल में कोमा की हालत में पड़ी हुई है !) के लिए  "मर्सी किलिंग" की मांग की गई है ! जिसको कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया! ज्ञात हो की अरुणा शानबागपेशे से एक नर्श थी !  सन १९६६ ई० में  वहमुम्बई के "के० ई० एम०" हॉस्पिटल में नर्श के पद पर नियुक्त हुई ! मरीजो की सेवा करना ही अरुणा का धर्म था ! उसका दुर्भाग्य यह था की वह नवम्बर सन १९७३ में एक वहशी दरिन्दे की हवश का शिकार हो गई ! उस वहशी का नाम था सुन्दरलाल गोस्वामी ! जब अरुणा हॉस्पिटल के बेश्मेंट में कपडे बदल रही थी तभी सोहनलाल ने उसकी अस्मत पर हमला बोल दिया ! उसने अरुणा के गले में कुत्ता बंधने वाली चेन को कस कर बंधा और उसके साथ बलात्कार किया ! गले में चेन का कसाव इतना मजबूत थ की अरुणा के मष्तिष्क का रक्तसंचार बाधित हो गया और वह कोमा में चली गई ! तब से अरुणा शानबाग अपंग पड़ी है उसके दाँत सड रहे है ! उसके हाथ पैर भीअकड़ने लगे है !  डाक्टरों ने यह स्पष्ट कर दिया है की उसकी हालत में सुधार होने की अब कोई गुंजाईश नहीं बची है ! इसलिए उसकी दोस्त और संरक्षक पत्रकार पिंकी वीरानी ने सुप्रीम कोर्ट से याचना की थी अरुणा को इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी जाए ! लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु की इस
याचिका को ख़ारिज कर दिया है ! इस घटना की सबसे दिलचस्प बात यह है की जिस व्यक्ति की वजह से अरुणा शानबाग की यह हालत हुई है वह सात साल की सजा काटने के बाद मजे की ज़िन्दगी जी रहा  है ! और उधर अरुणा है जो मौत से भी बदतर जिंदगी बशर कर रही है ! यहाँ पर सवाल यह उठता है कि आखिर अरुणा का क्या दोष है............? क्यूँ उस दुखिया को नारकीय जीवन जीने के लिए बाध्य किया जा रहा है ?  क्यूँ उसका गुनहगार आजाद  घूम रहा है ...................? क्या यही न्याय है कि एक बेगुनाह पल-पल घुट-घुट कर मरती रहे और गुनहगार  आजाद घूमता रहे .................? क्या अरुणा के गुनहगार को जो सजा दी गई है वो सही है.......................... ? वाह रे न्याय तू धन्य है ! कानून अँधा है सुना था अब तो प्रत्यक्ष देख भी लिया, वाकई कानून अँधा है !  
दूसरी तरफ है ओनोर किलिंग ! ओनोर किलिंग यानि झूठी आन-बान-शान के लिए की गई हत्या ! आज हम चाँद तारों को छू रहे है ! उन्नति के नए नए दरवाजे पर दस्तक दे रहे है ! लेकिन आज भी हमारे समाज में कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोग है जो जाती , धर्म जैसी खोखली बातों के लिए अपने ही लाडलो ही की हत्या कर देते है ! वास्तव में ये लोग किसी तुच्छ मानसिक उन्माद के शिकार होते है ! इनको अपनी इज्जत पर दाग लगता तब नहीं दिखाई देता जब इनके लाडले कोई गलत काम करके घर आते है ( किसी से लड़ झगड़, किसी लड़की को छेड़ कर कर आते है) आज तक शायद ही आपने सुना होगा की किसी पिता ने अपने बेटे के किसी गलत काम के लिए उसे पोलिश में दिया हो ! इनकी इज्जत तो तभी घटती है जब इनके बेटे अपनी मर्जी से अपना जीवन साथी चुनना चाहते है  अपनी मर्जी ख़ुशी की ज़िन्दगी जीना चाहते !  यहाँ पर प्रश्न ये उठता है की क्या किसी को अपने मन की जिंदगी चुनने का कोई हक़ नहीं है...................... ?
बात चाहे मर्सी किलिंग की हो या  ओनोर किलिंग की दोनों की ही स्थिति भारत में अजीब है !  देखा जाए तो हम बस नाम भर के लिए आजाद है ! बाकी हमारी ज़िन्दगी तो कभी इज्जत के नाम के ठेकेदारों के हाथों ख़त्म कर दी जाती है, तो कभी हमें नारकीय जीवन से मुक्ति पाने के लिए मौत की भीख मांगनी पड़ती है ! क्या यही हमारी आजादी है................ ? क्या ऐसा ही होता है न्याय............ ? क्या यही है हमारी स्वतंत्रता................... ? क्या यही है स्वतंत्रता का अधिकार........................ ? 
वाह रे दुनिया कैसी विडंबना है, जो जीना चाहते है उसे जीने नहीं दिया जाता है और जो मरना  चाहता  है उसे मरने नहीं दिया जाता है ! वाह रे स्वतंत्र भारत, वाह रे न्याय बहुत खूब जी रहे है हम !  

4 टिप्‍पणियां:

  1. sahi kah rahe ho pyase bhai...
    vo vahshi to maje se ji ra ha hai,

    kanoon to andha hai hi,
    uske samjh me ku6 bhi nahi ata,

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  2. apne bhut achha likha vakai ye samaj ki bhut bdi samsya hai jo gunah karta hai vo maje se rhta hai
    aur jo gunah jhelta hai jindagi uske liye jahannum ban jati hai
    asha hai pyasa ji aap aage bhi isi tarh lekh likhakar samaj ko agrasar karenge

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  3. fantastic, fabulous and very nice i agree with all things this is a very good

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अपना अमूल्य समय निकालने के लिए धन्यवाद
क्रप्या दोबारा पधारे ! आपके विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं !