शनिवार, 17 मार्च 2012

दिल को बहलाना सीख लिया {ग़ज़ल} सन्तोष कुमार "प्यासा"


जबसे तेरी यादों में दिल को बहलाना सीख लिया 
हमने मुहब्बत में खोकर भी पाना सीख लिया 
जब धड़कन-२ भीगी गम से, सांसे भी चुभने लगी 
दर्द की चिंगारी को बुझाने के लिए आंसू बहाना सीख लिया
तरसी-२ प्यासी-२ भटकती हैं मेरी नजरें इधर उधर 
जबसे तेरी आँखों ने संयत अदा में शर्मना सीख लिया
जबसे तेरे शहर में, तेरे इश्क में बदनाम हम हुए 
समझ गए ज़माने की अदा, दिल से दिल की बातें छुपाना सीख लिया
पन्नो में लिपटे, मुरझाए गुलाब की खुश्बू से सीखकर 
हमने ज़िन्दगी में खुद लुटकर सबको हँसाना सीख लिया 

3 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक, सुन्दर सृजन, बधाई.

    कृपया मेरे ब्लॉग" meri kavitayen" की नवीनतम प्रविष्टि पर भी पधारें.

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  2. सार्थक, सुन्दर सृजन, बधाई.

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